तो ऐसे आरुषी को मारा था उसके माता-पिता ने? पहले आरुषी का गला रेता और फिर उसके प्राइवेट पार्ट्स को…

लगभग 9 साल चला आरुषी-हेमराज हत्याकांड आखिरकार 12 अक्टूबर को कोर्ट के एक फैसले के बाद शायद अपने नतीजे पर पहुँच गया है. फैसला सही है कि नहीं , आरोपी कौन है? इन सवालो पर अभी भी संदेह बना हुआ है. मामला जितना संगीन था कोर्ट ने उतने ही इत्मीनान के साथ इस पर फैसला भी सुनाया. 16 मई 2008 को आरुषी की हत्या होती है और 17 मई को उसके संदिग्ध हत्यारे (जिसपर प्रथम दृष्टि में आरुषी की हत्या का आरोप था) की भी हत्या कर दी जाती है और 12 अक्टूबर 2017 को कोर्ट इस हत्याकांड पर अपना फैसला सुनाता है.

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इस मामले पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसी सजा तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कभी नहीं दी है. सुबूतों के आभाव में तलवार दंपति को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए. साथ ही कोर्ट ने ये भी माना है कि सीबीआई जांच में कई तरह की खामियां है ऐसे में सीबीआई अपनी जांच को जल्द-से-जल्द पूरा करना पड़ेगा. जानकारी के लिए बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. राजेश और नूपुर तलवार को बरी किया और साथ ही जेल से जल्द रिहा होने के आदेश भी दिया है.        इस फैसले से पहले गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को आरुषी के माता-पिता राजेश-नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन क्या आप जानते हैं अपनी दलील मनवाने के लिए सीबीआई ने कोर्ट में आरुषी-हेमराज की हत्या की क्या दलील पेश की थी?

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जानिए क्या थी इस मामले पर सीबीआई की थ्योरी?

सीबीआई ने अपनी थ्योरी में कहा था कि, “15 मई की रात को राजेश तलवार को लोगों की बात करने की आवाज़ आती है जिसे सुनकर वो हेमराज (नौकर) के कमरे की तरफ जाते हैं लेकिन हेमराज के कमरे में कोई होता ही नहीं है. राजेश तलवार का संदेह अब और बढ़ जाता है और वो अपनी गोल्फस्टिक लेकर आरुषी के कमरे की तरफ बढ़ते हैं. कमरा खोलते ही राजेश के पैरों तले की ज़मीन खिसक जाती है. वो वहां हेमराज और आरुषी को आपत्तिजनक हालत में देखते हैं ऐसे में अपनी बेटी को अपने नौकर के साथ इस अवस्था में देखकर राजेश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच जाता है और वो गोल्फस्टिक से हेमराज के सिर पर पीछे से २ वार करते हैं और फिर उसी स्टिक से आरुषी के सिर पर भी मार देते हैं. आवाजें सुनकर जब नुपुर आरुषी के कमरे में आती हैं तो वो अपने पति राजेश के साथ मिलकर हेमराज की लाश को छत पर छोड़ने में मदद करती हैं. वहां लेजाकर राजेश ने हेमराज का गला रेत दिया. फिर वो दोनों नीचे आते हैं तो देखते हैं कि आरुषी अभी जिंदा है. जिसके बाद गुस्साए राजेश ने आरुषी का गला भी रेत दिया ताकि पुलिस को कोई शक ना हो. इतना सब करने के बाद आरुषी की माँ ने आरुषी के प्राइवेट पार्ट्स को भी साफ़ किया.”

हालाँकि माना जा रहा है कि सीबीआई की इस थ्योरी में काफी कमियां है जिसके चलते नुपुर और राजेश तलवार को कोर्ट ने बरी कर दिया है.

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